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पिलिया jaundice को जड से ठीक करे । कामला, यकृत विकार का एक प्रमुख रोग है, जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में जाण्डिस (Jaundice) या पीलिया के नाम से पहचाना जाता है। आयुर्वेद की विभिन्न संहिताओं जैसे चरक, सुश्रुत, हारित, माधव निदान एवम् अष्टांग हृदय में कामला के उत्पन्न होने के कारण की चिकित्सा विधि का वर्णन किया गया है। महर्षि चरक के अनुसार कमला की उत्पत्ति मुख्यतः पित्त की वृद्धि एवम् पित्त वर्धक आहार के अत्यधिक सेवन से शरीर में बनने वाले रक्तगत पित्त की मात्रा बढ़ जाने से होती है। आयुर्वेद में कमला रोग की चिकित्सा के लिए बहुत सी औषधीय पादप निर्मित औषधियों एवम् औषधीय योगों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से प्रमुख पादप जैसे पुनर्नवा, अमृता, कालमेघ, कुटकी, भूम्यामलकी एवम् कुछ औषधीय योग जैसे त्रिफला और फल त्रिकादि क्वाथ है। आधुनिक विज्ञान में प्रायोगिक जंतुओं पर पेरासिटामोल प्रेरित यकृत विषाक्तता परीक्षण प्रयोग कर लिवर फैक्सन टेस्ट (एल. एफ.टी) (रक्तगत सीरम बिलिरुबिन, एस. जी. ओ. टी., एस. जी. पी. टी.) के स्तर का मापन करके कामला बीमारी का उपचार किया जाता है। साथ ही साथ यकृत के उतको का ऊतकविकृतिविज्ञान (Histopathology) प्रौद्योगिकी द्वारा अध्यन भी कामला रोग के उपचार के प्रभावी विश्लेषण में उपयोगी है। डॉ रविंद्र बोराडे ने हजारों पेशेंट को इस जटिल बीमारी से ठीक किया है। लिवर संबंधित व्याधि पर उनका विशेष अनुसंधान है। पुणे आयुर्वेद pune ayurved